Visit to a Hill Station | Mussorie ki sair | Pahari ilake ki sair

पहाड़ी इलाक़े की सैर

गर्मी की छुटियों में सब लोग पहाड़ी इलाके पर जाने की इच्छा रखते है. मेरे स्कूल में गर्मी की छुट्टियां 15 मई से हो गयी हैं. दिल्ली में इस समय बहुत गर्मी है. मेरे माता-पिता ने मसूरी जाने का फैसला किया. यह सुन मैं ख़ुशी से झूम उठा.

हम सबने अपना सामान बांधना शुरू कर दिया और इस सफर पर निकल गए. सुबह को पहले हम ट्रेन से देहरादून गए. देहरादून से बस में हम मसूरी की तरफ के लिए निकल पड़े. दोपहर तक हम देहरादून पहुँच गए और एक होटल में हमने शरण ली.

मसूरी हिन्दुस्तान के सबसे अच्छे सबसे पहाड़ी इलाकों में से एक है. यहाँ बहुत सी घूमने की सुन्दर स्पॉट्स हैं. एक दिन हमने होटल में ही विश्राम किया. अगले दिन सुबह नाश्ते के बाद हम घूमने के लिए निकल पड़े. सबसे पहले हमने कुलरी लाइब्रेरी और लंढौर मार्किट देखीं। दोनों जगहों पर खूब रश था. देश के अलग अलग जगहों से बहिउ से यात्री वहां आये हुए थे. लोग उस मार्किट में अलग अलग तरह की खरीदारी कर रहे थे.

दोपहर के खाने के बाद हम मॉल की तरफ निकल पड़े. उसके बाद कैमल बैक नमक एक जगह पर भी गए हम. वहां की एक एक चीज़ इतनी खूबसूरत है कि देखकर मन को अति प्रस्सनता होती है. हर इंसान को ज़िन्दगी में एक बार मसूरी ज़रूर जाना चाहिए. यहाँ का स्केटिंग हॉल जो फैशन और रंगों से भरपूर है, देखने लायक है. हमने केम्पटी फॉल (Kempty Fall) और खूबसूरत बर्फ से ढके हुए पहाड़ों के भी दर्शन किये.

मसूरी का मौसम कमाल का है, बहुत सुन्दर, न ज़्यादा गर्मी और न ज़्यादा ठण्ड. पहाड़ियां लम्बे हरे पेड़ों से भरी हुयी हैं
मसूरी की ठण्ड महसूस करने के बाद तो शहरों की गर्मी भूल ही जाती है।
मुझे प्रकृति की गोद में जा कर बहुत प्रसन्नता हुई ।
वहां के विविध रंग के सुन्दर फूल , आकाश में बिखरे बादल और बर्फ से ढकी पहाड़ियां देख कर मेरा मन ख़ुशी से झूम उठा।
हम वहां 15 दिनों के लिए रहे। वहां की यादें अभी भी मेरे मन में ताज़ा हैं।
जब भी उदास महसूस करता हूँ, मैं अपनी ऑंखें बंद कर के मसूरी के मधुर अनुभव को याद कर लेता हूँ, जिससे मेरा मन फिर से तरोताज़ा हो जाता है।