Terrorism Essay In Hindi | आंतकवाद

Essay In Hindi On Terrorism

 

आंतकवाद

 

आज संसार के अनेक देशों में आंतकवाद गले की हड्डी बनकर अटक गया है.

प्रतिदिन विमान अपहरण, बैंकों की लूट, बस यात्रियों की निर्मम हत्या, इमारतों को विस्फोट से उड़ाने आदि की दुर्घटना सुनने और देखने को मिलती है. कुच्छ लोग इसे सत्ता के साथ विद्रोहियों और असंतुष्टों के युध की सन्ज्ञा देते हैं किंतु यह उचित नहीं है. युध के भी कुछ नियम होते हैं. आंतकवाद किसी नियम, किसी सीधांत, किसी आदर्श से बँधा नहीं है. यह तो कोरी हत्या है. “बूढ़े मरे या जवान, हत्या से ही काम ” इनका सीधांत है. आज अनेक देशों में इन आंतकवादियों ने लोगों की नींद हराम कर रखी है. आंतकवाद का जन्म व्यवस्था के साथ ही साथ हुआ होगा. किंतु आधुनिक आंतकवाद का जन्म विश्वयुध के समय हुआ जब हिट्लर ने लाखों लोगों का अपहरण कर उन्हें विभिन्न शिविरों में डाल दिया और उन्हें अमानवीयों यातनायें दी. बाद में सबको कत्ल कर दिया गया. रूस के लोग उन लोमहर्षक कृत्यों को भी भूल नहीं पाएँगे. आज महाशक्तियों दुनिया में अपना वरस्व कायम करने के लिए तरह-तरह के आंतक का सहारा ले रही है.

 

भारत में आंतकवाद का वर्तमान इतिहास नक्सलवादियों से शुरू होता है. वही हत्या, लूटपाट, अपहरण का रास्ता उन्होने चुना. मिज़ोरम , नागालैंड बहुत दिनों तक आंतकवादियों का क्रीड़ा शेत्र बने रहे. पंजाब भी उसकी लपेट में आ गया. इस हिंसा को कैसे रोका जाए ? आंतकवादी को हथ्यारोन, यानों, और आर्थिक संस्थानों की आवयशकता होती है, उसे परीक्षण भी काम्य होता है. इन सबके लिए उसे किसी ना किसी राष्ट्र का सहारा लेना पड़ता है, प्रयत्न यह किया जाना चाहिए की कोई भी देश इस प्रकार की गतिविधियों को प्रोत्साहन ना दे. यह तभी संभव है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सब मिल जुल कर इस समस्या के समाधान का प्रय्तन करें.