Sweet Speech Hindi Essay मधुर भाषण

मधुर वाणी औषधि के समान होती है, जबकि कटु वाणी तीर के समान कर्ण द्वार से प्रविष्ट होकर सम्पूर्ण शरीर को पीड़ा देती है । मधुर वाणी से समाज में परस्पर प्रेम की भावना बढ़ती है ।

केवल अच्छी भेष-भूषा धारण करने से ही समाज में स्थान नहीं मिल सकता, अपितु वाणी की मधुरता और आचरण की शिष्टता ही मनुष्य को स्थायी सम्मान दिलवा सकती है । मधुर वाणी में हृदयगत भावों की सच्चाई और भी अधिक आवश्यक है । दुष्ट व्यक्तियों की वाणी मधुर होती है, पर उनका हृदय कलुषित होता है ।

अतः मधुर वाणी के साथ कर्मों का श्रेष्ठ होना भी अनिवार्य है । कर्मों की श्रेष्ठता और वाणी की मधुरता में गहरा सम्बन्ध है। कटु वचन बोलने वाले को कभी सम्मान नहीं मिलता है । मधुर भाषण समाज में सुख कि सृष्टि करता है । मधुर वाणी लोगों के मन में विश्वास, स्नेह और प्रेम की भावना उत्पन्न करती है ।

मधुर वचन बोलने से केवल श्रोता को ही नहीं बल्कि वक्ता की आत्मा भी आनंद अनुभव करती है । कहा गया है-
” ऐसी वाणी बोलिये मन का आपा खोय ।
औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय ।।”
अतः अपने जीवन में मधुर वाणी के महत्व को समझना चाहिए ।