Sister Nivedita Hindi Essay बहन निवेदिता

भारत के आजादी के संग्राम में महिलाओं का भी बहुत योगदान रहा है I अनेक महिलाओं ने देश की आजादी की लड़ाई में बढ़ चढ़कर भाग लिया I उनमें से एक थी बहन निवेदिता I

बहन निवेदिता का असली नाम मारगरेट था I उनका जन्म 28 अक्टूबर 1867 को एक आयरिश परिवार में हुआ, पिता का नाम सैम्युल तथा माता का नाम मेरी हैमिलटन था I बहन निवेदिता को भारत से बहुत प्यार था I एक धर्मगुरु के विचारों का नन्ही मारगरेट पर बहुत प्रभाव पड़ा I 1895 में मारगरेट की एक सहेली ने उसका परिचय स्वामी विवेकानंद जी से करवाया । स्वामी जी से प्रभावित होकर उसने अपना जीवन जनसेवा के लिए समर्पित कर दिया I

अपना देश त्याग कर 28 जनवरी 1898 को वह भारत आ गई I अब यही उनकी कर्मभूमि थी I अब वह स्वामी जी की शिष्या बन गयी और उनका नाम बदलकर निवेदिता रखा गया I निवेदिता का अर्थ है समर्पित I पाश्चात्य संस्कृति त्याग कर उन्होंने भारतीय संस्कृति अपना ली I सबसे पहले बहन निवेदिता ने एक छोटी सी पाठशाला शुरू की I

सबसे पहले बहन निवेदिता ने एक छोटी सी पाठशाला शुरू की I 1899 में कलकता में फैले प्लेग के रोग में बहन निवेदिता ने रोगियों की बहुत सेवा की स्वयं बीमार भी पड़ी पर उन्होंने दिन रात रोगियों की सेवा की I 3 जुलाई 1902 को स्वामी जी के महासमाधि लेने के बाद वह पुरे साहस से आजादी की लड़ाई में कूद पड़ी I उसने लोगों को वेदों और पुराणों का महत्व समझाया और उनमें आत्मसम्मान जगाया और उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखी I

धीरे-धीरे उनके समर्थकों की संख्या बढ़ती गई और वह युवा वर्ग के लिए एक आदर्श बन गई I 13 अक्टूबर को उनकी मृत्यु हो गई I भारत की जनता उनकी सेवा-भावना को कभी नहीं भुला पायेगी I