KABIR DASS Hindi Biography Essay कबीर दास

KABIR DASS कबीर दास

जी के जन्म का कोई ठोस प्रमाण नही हैं पर माना जाता है कि उनका जन्म सन १३९८ में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन वाराणसी के निकट लहराता नामक स्थान पर हुआ था । उनकी माता का नाम नीरू था । परन्तु कहा जाता है कि नीरू ने इन्हे सरोवर के पास से उठाया था ।

छ ;महीने बाद इनका नाम करण किया गया और इनका नाम कबीर रखा गया । कबीर बचपन से ही साधुओं की संगति पसंद करते थे । कबीर जी का बचपन बहुत ही जड़ताओं और रूढ़ियों से जूझते हुए बिता है । कबीर बचपन से ही सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध थे । यह कहना बिलकुल गलत नहीं है की जीवन में गुरु के महत्व को कबीर दास जी ने अपने दोहो में पूरी आत्मीयता से है। कबीर जी जाति -पाति ,ऊंच -नींच के बंधनो से दूर फकड़ ,अलमस्त और क्रान्तिदर्शी थे ।

 

कबीर जी का व्यक्तित्व अनुकरणीय है । कबीर जी ने समाज की हर कुरीतियों का विरोध किया । कबीर जी की वाणी बहुरंगी थी । कबीर जी ने किसी भी ग्रन्थ की रचना नही की थी । परन्तु उनकी मृत्यु के बाद उनके शिष्यों ने उनके उपदेशो का संकलन किया जो ‘बीजक ‘नाम से जाना जाता है । इस ग्रन्थ के तीन भाग है ‘सखी’,’सबद’ , और ‘रमैनी ‘। कबीर जी परमात्मा को मित्र ,माता ,पिता के रूप में देखते थे । कबीर जी का कहना है कि परमात्मा ही मनुष्य के सर्वाधिक निकट है ।