Sachin Tendulkar Essay In Hindi

Sachin Tendulkar Essay In Hindi

 

अनेकों बार भारत की जीत और हार के बीच खड़े साची ने जिस कौशल से दबावों का सामना किया है उसने उन्हें कुंदन बना दिया.

वह बार बार दबावों की आग में तपे. उन्होने साबित कर दिखाया की प्रतिकूल परिस्थितियों में प्रतिभा के फूल खिल सकते हैं. साची तेंदुलकर अत्यंत सरल और साधारण इंसान हैं. अपना खाली समय वे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गुज़ारना पसंद करते हैं. युवाओं का आदर्श बन चुके सचिन का करीयर बेदाग और विवादों से परे है. यह भी उनकी एक बड़ी उपलब्धि है.सचि तेंदुलकर का जनम २३ एप्रिल,१९७३ में हुआ. क्रिकेट जगत में साची एक जीती जागती मिसाल बन गये हैं. किसी भी मैच में हार -जीत की उम्मीद साची पर ही निर्भर करती है. उनके आउट होने पर दर्शकों पर तथा पूरी टीम पर मनोवैगयानिक प्रभाव पड़ता है जिसका प्रभाव पुर मैच को प्रभावित करता है.

 

बचपन में सचिन बहुत ही शरारती था. वह प्राय: शरारत करता था और मैच खेलने के लिए समय पर नहीं आता था. एक दिन तो देर से आने की वजह से उन्हे मैच खेलने नहीं दिया गया. यह सज़ा साची के लिए काफ़ी थी . उसके बाद से तो वह सदा समय पर आने लगा. प्रशिक्षक ने बताया कि जब साची उनके संपर्क में आया तो बच्चा था, पश्चिम मुंबई के उपनगर बांद्रा में साहित्य निवास कॉलोनी में दोस्तों के साथ खेलते हुए पेड़ से गिर गया. उसके बाद से साची के पिता और बड़े भाई ने निश्चय किया कि सचिन को शिवाजी पार्क में खिलाया जाए. इस प्रकार सचिन को श्री आचरेकर के पास लाया गया. बांद्रा से शिवाजी पार्क बहुत दूर है अत: सचिन दादर में एक रिश्तेदार के पास रहने लगा.

 

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