Rickshaw wala Rikshawpuller hindi essay

रिक्शावाला
आजकल हम रिक्शे वालों को शहर में हर तरफ देख सकते हैं
रिक्शे वाले ज्यादातर बस अड्डा तथा रेलवे स्टेशनों पर खड़े रहते हैं
रिक्शा वालों को हर तरह की सवारी से बात करनी पड़ती है
उनकी सवारी एक पढ़े लिखे आदमी भी हो सकते हैं, गांववाले भी हो सकते हैं, स्कूल जाने वाले बच्चे तथा व्यापारी भी हो सकते हैं
रिक्शा वालों को बड़ी ही समझदारी से सबकी बात समझनी तथा सुननी पड़ती है
रिक्शा वालों को अपना रिक्शा कच्ची तथा पक्की सड़कों पर दौड़ाना पड़ता है
रिक्शे वालों को हर मौसम में काम करना पड़ता है
चाहे रिक्शावाला थका हुआ है, चाहे सांस चढ़ा हुआ है उसे अपनी सवारी के अनुसार अपना रास्ता तय करना पड़ता है
रिक्शे वाले ज्यादातर गरीब आदमी होते हैं
वह सादा भोजन करते हैं तथा फटे हुए कपड़े पहनते हैं
अगर वह रिक्शा किराए पर लेकर चलाते हैं तो उन्हें अपनी आधी कमाई रिक्शा के मालिक को देनी पड़ती है
उन्हें अपने परिवार की और माता-पिता की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है
कई बार तो रिक्शे वालों को पूरा खाना भी नहीं मिलता
उन्हें अक्सर अपना खाना बीच में ही छोड़कर अपनी सवारी को उनके गंतव्य स्थान पर पहुंचाने के लिए निकलना पड़ता है

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