Pollution Problem’s Solution Essay In Hindi

प्रदुशण कि सम्स्या और समाधन
रूप्रेरेखा-प्रस्तवना-प्रदुशण का अर्थ-प्रदुशण के कारण‌ ‌- ‌प्रदुशण के प्रकार- वायु,जल,ध्वनि,भूमि प्रदुशण-प्रदुशण के दुश्परिनाम- प्रदुशण से बचने के उपाय- उप्सन्हार ।
आज का युग विज्ञान का युग है । विज्ञान से जहाँ मनुश्य को कुछ वरदान मिले हैं, वहीं कुछ अभिशाप भी मिले हैं | प्रदुशण भी विज्ञान-प्रदूत ऐसा ही अभिशाप है | आज प्रदूषण किसी एक देश तक सीमित ना रहकर विश्व-व्यापी समस्या बन गया है, जिससे सम्पुर्ण मानव- जाती त्रस्त है |

‘प्रदूषण’ शब्द ‘दुषण’ मे ‘प्र’ उपसर्ग लगाकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है खराबी या दूषित होना | यहाँ प्रदूषण से तात्पर्य है -प्राकृतिक संतुलन मे दोष पैदा होना; शूध वायु, जल, खाद्या पदार्थों का अभाव; वातावरण मे अशांति |
प्रदूषण के अनेक कारण हैं | वनों की अंधाधुंद क्टयि, महानगरों का फैलाव, यातायात के साधनों तथा कल कार्खानो का शोर, धुआँ और व्यर्थ पधार्थ, रास्नायिक खाड़ों का प्रयोग आदि प्रमुख कारण है ।
इन सब से प्रकृति का स्वाभाविक संतुलन बिग्ड़्ता है | पेधों के अभाव मे ऑक्सिजन की कमी, ऋतु-चक्र मे अनिमियता, जीव जंतुओं का अभाव तथा भूमिकटाव जैसी स्मसाएँ उत्पन्न हो रही हैं |
प्रदूषण से पूर्णतः मुक्ति पाना आज शायद संभव नही है क्यूंकी हम वैज्ञानिक उपलब्धियों को त्याग कर नही जी सकते, किंतु यदि सावधानी से काम लिया जाए तो प्रदूषण के दुष्परिणामो को कुछ कम किया जा सकता है | व्रिक्शरोपण को बढावा देकर, कार्खानो कि चिम्नियान उंचि करके, वाह्नो की ध्वनि और धुए कि समय समय पर जांच करवा कर, रेडियो, लाउड स्पीकर की ध्वनि कम रखकर हम प्रदूषण पर कुछ हड्द तक नियंत्रण कर सकते हैं |
इस प्रकार कहा जा सकता है की प्रदूषण आज एक अत्यंत गंभीर समस्या बन गया है | संपुरण विश्व इससे चिंतित है | वैज्ञानिक प्रगति, औद्योगिक क्रांति तथा आधुनिक सभ्यता सभी का मकसद मानव को सुखी, समरध और स्वस्थ बनाना है | प्रदूषण इसमे सबसे बड़ी बाधा है | उसे दूर करने के लिए और मानव सभ्यता की रक्षा के लिए हम सबको मिलजुल कर प्रयत्न करना होगा |