My Country Essay In Hindi स्वदेश प्रेम

स्वदेश प्रेम

‘हृदय नहीं वह पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं’, ‘जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान है’- ऐसी अनेक काव्य पंक्तियाँ देश के प्रति हमारे स्वाभाविक प्रेम को दर्शाती हैंI

वास्तव में जिस धरती पर हम जन्म लेते हैं, जिस पर पलकर बड़े होते हैँ, उसके प्रति स्नेह उत्पन्न होता ही हैI जिसकी मिटटी से हमारा शरीर बना है, उसका ऋण हम कभी भी चुका नही सकतेI यदि हम अपने देश कि संस्कृति और परंपराओं को समझें, यंहा के प्राकृतिक सौंदर्य में अपना मन रमाएँ, यंहा के ज्ञान-वैभव को समझें तो निश्चय ही हमारे भीतर देश के प्रति लगाव और बढ़ेगा, देशभक्ति की भावना को बल मिलेगाI

यह देशभक्ति हमारे कर्मों और वाणी दोनों से प्रकट होती हैI
देशभक्त संकटकाल में अपना सर्वस्व समर्पण करने को तैयार रहता है, वह अपने कार्यों से देश का गौरव बढ़ाता हैI

सच्चा देशभक्त कभी ऐसा काम नहीं करता जिससे उसके देश का नाम ख़राब हो, वह कभी अपने देश कि निंदा नहीं करता, उसे औरों की तुलना में नीचा नहीं दिखाताI उसका प्रत्येक कार्य स्वार्थ हित न होकर देश हित में होता हैI इसलिए उदार भावना को अपनाएं और सबके हित कि सोचेंI

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