करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान Practice Makes Man Perfect Essay

अभ्यास के बल पर मूर्ख भी बुद्धिमान हो जाता है, अज्ञानी भी ज्ञानी हो जाता है I इतिहास साक्षी है कि अभ्यास एवं परिश्रम के बल पर असंभव दिखाई देने वाले कार्य भी संभव हो जाते हैं I ऋषि-मुनियों कि सिद्धियाँ, वैज्ञानिकों के अविष्कार, राजाओं कि विजय गाथाएं सब इसी का प्रमाण हैं कि यदि मनुष्य हिम्मत न हारे और निरंतर अभ्यास और प्रयास करता रहे तो फिर अंसभव शब्द के लिए कंही स्थान नहीं I बार-बार एक ही काम को कर उसमें निपुण होने का प्रयास ही अभ्यास है I
अतः लगन, परिश्रम, आशा तथा स्वयं पर विश्वास इसके साथी हैं I जिस व्यक्ति के पास ये गुण विद्यमान हैं वह किसी क्षेत्र में हार नहीं सकता चाहे वह शिक्षा हो, खेल-कूद हो या कला-कौशल, सफलता उसके कदम अवश्य चूमेगी I शरीर को स्वस्थ एवं पुष्ट रखने के लिए जैसे निरंतर व्यायाम कि आवश्यकता होती है वैसे ही मन एवं बुद्धि के विकास के लिए भी निरंतर अभ्यास जरुरी है I