Indian Democracy & Newspapers Hindi Essay

Indian Democracy & Newspapers Hindi Essay
लोक्तंत्र और समाचार- पत्र
रूपरेखा- प्रस्तावना-लोकतंत्र-अर्थ और महत्व- लोक का प्रहरी-जनमत निर्माता-राजनीतिक दलों की वास्तविकता प्रकट- संसद की सूचना- उपसहंर |
विश्व मे अनेक प्रकार की शासन-व्यवस्तायन प्रचलित हैं | कहीं राजतंत्र हैं, कहीं तानाशाही तो नही लोकतंत्र | आज के युग मे जनसाधारण के बढ़ते महत्व के कारण इसे जन- साधारण का युग कह सकते हैं | अपने अधिकारियों और सुविधाओं के प्रति जागरूक और उन्हे प्राप्त करने के किए तत्पर, जान समुदाय के लिए एक सुचारू शासन-व्यवयस्था के रूप मे लोकतंत्र को अत्यधिक लोकप्रियता प्राप्त हो गई है |
लोक्तन्त्र के नाम से ही स्पशट है की यह लोगों की शासन- व्यवयस्था है | ‘जनता के किए, जनता द्वारा, जनता की सरकार लोक्तन्त्र है'(अब्राहम लिंकन) अर्थात इसमे जनता ही महत्त्वपूर्ण है,अन्य कोई नही | इसलिए लोकतंत्र को जनतंत्र या प्रजातंत्र भी कहा जाता जाई | इसमे जनता के चुने हुए प्रतिनिधि सरकार का गठन करते हैं | इस तंत्र मे राज्य की तुलना मे व्यक्ति को महत्त्व दिया जाता है | इसमे जनता के लिए शासन है , शासन के लिए शासन नहीं| वास्तव मे लोकतंत्र मे जनता प्रत्यक्ष रूप से शासन ना करके अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों के द्वारा शासन चलते है | संसद मे बहुमत दल का नेता प्रधानमंत्री बनता है और मंत्रिमंडल बनाता है, जो संसद के समक्ष उत्तरदायी होता है |

चुनाव के पश्चात संसद मे ज्न-प्रतिनिधियों द्वारा व्यक्त विचारों को जनता तक पहुँचाकर समाचार-पत्र जान-जागरण के अग्रदूत की भूमिका निभाते हैं | शिव के तीसरे नेत्र की भान्त समाचार-पत्र जान-विरोध रूपी कामदेव को भस्म करने की शक्ति रखते हैं | ऐसे मे समाचार पत्र के संपादकों एवम् प्रकाशको का भी यह कर्तव्य है की वे निष्पक्ष रहकर वास्तविकता का प्रकाशन करें | सरकार का भी यह उत्तरदायित्व हो जाता है की वह समाचार पत्रों पर अनावश्यक अंकुश ना लगाकर उन्हे स्वत्तंत्र- पूर्वक कार्य करने दे | तभी समाचार-पत्र लोकतंत्र के प्रहरी की अपने भूमिका कुशलतापूर्वक निभा पाएँगे |
अत: स्पष्ट है की लोकतंत्र का महेत्वपोरंण अंग है- समाचार पत्र, जो लोकतंत्र को निर्देशित, नियंत्रित करके सार्थक बनाता है |