Hindi Essay On Ozone Layer | ओज़ोन परत

ओज़ोन परत : धरती का रक्षा कवच

Ozone Layer Hindi Essay

 

 

ओज़ोन वायुमंडल में एक सूक्ष्म परत के रूप में विधयमान है जो स्मूह स्तह से ६० कि . मी . की उँचाई तक विविध सांद्रता में तथा पृथ्वी की स्तह से २०-२५ कि. मी. की उँचाई में मिलता है.

ओज़ोन की सार्वधिक मात्रा १५-३० कि. मी. की उँचाई पर पाई जाती है. पृथ्वी पर लाकर स्पष्ट फैला दिया जाए तो मात्र ३ कि. मी. की परत के रूप में दिखाई पड़ेगी. पिच्छले कुछ वर्षों से वायुमंडल में ओज़ोन गैस की कमी को अनुभव किया गया है और जहाँ कहीं ओज़ोन की अधिक क्षति हुई है उसे ओज़ोन छिद के नाम से अलंकृत किया गया है. विभिन्न संस्थाओं द्वारा किए गये अनुसंधान से यह पता चला है कि दो ओज़ोन छिद्र हैं – 

१.अंतार्टिका महासागर के ऊपर 

२.२. आर्कटिक महासागर के ऊपर .

 

 ओज़ोन को क्षति पहुँचाने वाले तत्व की दो अलग अलग स्मूहों की पहचान की गयी है – 

१. क्लोरोफलूरो कार्बन

 २. हेलंस ( अग्निशभन में प्रयुक्त )

 

वर्तमान समय में ओज़ोन की कमी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुला विचार विमर्श हो रहा है और मेरी समझ से यह विचार विमर्श तब तक चलेगा जब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो जाता. और इसी बीच विश्व समुदाय को विश्वास में लेने के लिए यह आव्यशक् है कि पर्यावरण को हानि पहुँचाने से रोकने वेल सभी कदम गंभीरता से उठाए जायें और अगर ऐसा न हो पाया तो यह मनुष्य को स्वयं सोचना है कि प्रवृत्ति उन्हें दन्ड्स्वरूप कौन सा उफार दें ?