Doordarshan Television Hindi Essay | दूरदर्शन टेलीविज़न

दूरदर्शन ( टेलीविज़न )

 

इस युग में विज्ञान के नये नये आविष्कार रोज़ हो रहे हैं. चारों तरफ मानव को दिए गये विज्ञान के उपहार भरे पड़े हैं.

आज मनुष्य विज्ञान की शक्ति से आकाश में उड़ रहा है, देश विदेश की घटनाओं को कानों से सुन भी रहा है और आँखों से देख भी रहा है. विशाल महासागरों को निर्भयता से पार कर रहा है. दूरदर्शन नाम से स्पष्ट होता है कि डोर के दर्शन हम घर बैठे कर सकते हैं. टेलिविज़न का पहला सफल प्रयोग सन् १९१५ में ब्रिटेन के जान एन बेथर्ड  ने किया था. 

 

टेलीविज़न में जिस व्यक्ति या वस्तु का चित्र भेजना होता है उससे प्रतीक्षित प्रकाश की किरणों को पहले विद्युत तरंगों में बदला जाता है. फिर उसके एक-एक बिंदु के प्रकाश और अंधकार को एक सिरे से क्रमश: विद्युत तरंगों में परिवर्तित किया जाता है.इन विद्युत तरंगों को ट्रांसमीटरों द्वारा रेडियो तरंगों में बदल दिया जाता है. टेलिविज़न की सीरियल इन तरंगों को ग्रहण करता है और टेलिविज़न सेट में लगे पुर्ज़े उन तरंगों को बिजली की तरंगों में बदल देते हैं.

 

विद्युत तरंगों से टेलीविज़न सेट में लगे एक बड़ी टीयूब के अंदर एलेकट्रोन नामक विद्युत कणों की धारा उत्पन्न हो जाती है. इस टीयूब के सामने के भाग में , भीतरी दीवार पर एक ऐसा रसायन लगा होता है जो एलेकट्रोन के प्रभाव से चमकने लगता है. टेलीविज़न मनोरंजन का आधुनिक साधन है. टेलीविज़न में हम कार्यक्रम में ले रहे व्यक्तियों को तत्क्षण रूप से देख सकते हैं. मानो वे हमारे सामने रंगमंच पर कुछ कर रहे हों. कुछ देशों में किसानों को टेलीविज़न के द्वारा खेती की नयी नयी विधियाँ सिखाई जाती हैं. सबसे आश्चर्यजनक चमत्कार पृथ्वी से डोर स्थित ग्रहों की सॉफ तस्वीर खींचकर दिखना है. टेलीविज़न कार्यक्रम योजना के अनुसार ३४% शिक्षा को, ६% मनोरंजन को, १२%कृषि को तथा ९% मौसम संबंधी समाचारों के प्रसारण प्रदर्शन को दिया जाएगा. कुछ ही वर्षों में टेलीविज़न कृषि सुधार , परिवार नियोजन, मद्द निषेद-प्रौड शिक्षा आदि क्षेत्रों में सामूहिक शिक्षा का एकमुश्त साधन सिद्ध होगा.