Bhrashtachar Essay Corruption Paragraph Hindi

Bhrashtachar Essay Corruption Paragraph Hindi
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BHRASHTRACHAAR/CORRUPTION

bhrashtachar ek bhishan samasya hindi essay | Corruption Ki Samasya Aur Roktham

भ्रष्टाचार दो शब्दों को मिलकर बना है भ्रष्ट +आचार । भ्रष्ट का अर्थ होता है बुरा और आचार का अर्थ होता हैं आचरण अथार्त भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ हुआ वह आचरण जो किसी भी प्रकार से अनैतिक और अनुचित हो ।

जब कोई मनुष्य न्याय व्यवस्था द्वारा बनाए गए नियमो का उलंघन करके अपने स्वार्थो को पूरा करने के लिए गलत मार्ग अपनाये वह व्यक्ति भ्रष्टाचारी कहलाता हैं । भारत जिसे सोने की चिड़िया कहा जाता है उस भारत देश में अब भ्रष्टाचार का पेड़ अपनी जड़े फैला रही है ।

भ्रष्टाचार कई कारणों से फैलता हैं जैसे असंतोष,जब किसी व्यक्ति को किसी वस्तु की जरूरत है और उसे नही प्राप्त होती तो उसमें असंतोष पैदा होता है और वह व्यक्ति उस वस्तु को पाने के लिए अच्छा या बुरा काम करता हैं । दूसरा कारण भ्रष्टाचार का यह भी है की मनुष्य अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए किसी भी तरह का अच्छा हो या बुरा रास्ता अपनाता है । तीसरा कारण असमानता के कारण भी हमारे देश में भ्रष्टाचार फैल रहा है ।

भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए भारत सरकार को बहुत ठोस कदम उठाने चाहिए। जब हमारे देश से भ्रष्टाचार ख़त्म हो जायेगा तो हमारा देश एक बार फिर से सोने की चिड़िया कहलायेगा ।