Advertisements Hindi Essay | विज्ञापन: लाभ और हानि

Hindi Essay On Pros & Cons of Advertisements

विज्ञापन: लाभ और हानि

 

आज के इस वैज्ञानिक युग में विज्ञापन का मेहत्त्व काफ़ी बढ़ गया है जिसके फलस्वरूप विज्ञापन अजेंसियों की लोकप्रियता भी काफ़ी बढ़ गयी है. आज उपभोगता को प्रभावित करने के लिए उत्पादन विज्ञापन की झड़ी लगा रहा है.

वैसे तो किसी व्यक्ति या वस्तु के गुण बिना प्रसारित किए नहीं जाना जा सकता, लेकिन प्रचार – प्रसार में एक त्रुटि यह भी है की गुणहीन वस्तुओं को भी गुण युक्त वस्तुओं की बराबरी में ला दिया जाता है. उपभोगताओं के बीच एक संशय उत्पन्न हो जाता है की अमुक वास्तु वस्तुत : गुण युक्त है या नहीं. आज व्यापार की दृष्टि से प्रचार-प्रसार वान्छित है लेकिन अर्थ से अनर्थ भी हो रहा है. बड़ी कंपनियाँ साधारण सी वस्तु का इतना भारी भरकम विज्ञापन देती हैं की आम आदमी उसके झाँसे में आ जाता है. विज्ञापन के चमक-दमक में आदमी ठगा भी जाता है. यह भी सच है की विज्ञापनो द्वारा ही उपभोगता वर्ग के संपर्क में आ पाता है.

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